Monday, April 20, 2015

कुछ अशआर : आज कुछ लम्हों के लिए मेरे पहलू में बैठ

आज
कुछ लम्हों के लिए मेरे पहलू में बैठ
मेरी आँखों में देख
कोई बात न कर
हो सके तो दिल की धड़कने भी
रोक लेते हैं दोनों
सिर्फ ख़ामोशी से
बता अपने दिल की ज़ुबान

तेरे दिल के ज़ख्म
मेरे दिल का गुबार
एक मुकम्मल मुलाक़ात
के मुल्तजी हैं
तेरे ज़ख्म भरने के लिए
मेरे आँसू बदहवास हैं

आज
कुछ लम्हों के लिए
सब भूल कर
बस
मुझे देख
मुझसे बात कर
इन कुछ लम्हों को
एक ज़िन्दगी का
जामा हासिल करा

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